बीते साल अगस्त में ही ईपीएफओ ने ईपीएस यानी एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम 1995 में बदलाव को मंजूरी दी थी। इसके तहत पीएफ खाताधारकों के लिए पेंशन के कम्युटेशन यानी एकमुश्त आंशिक निकासी और पूरी पेंशन की बहाली की पुरानी सुविधा कुछ बदलावों के साथ फिर से अमल में आनी है। नए बदलावों से यह सुविधा और भी आकर्षक हो जाएगी। इस बदलाव को लागू करने से संबंधित अधिसूचना श्रम मंत्रालय द्वारा जारी की जानी है। गौरतलब है कि ईपीएफओ अपने खाताधारकों को 26 सितंबर 2008 से पहले तक कम्युटेशन की सुविधा प्रदान कर रहा था, लेकिन बाद में यह सुविधा हटा ली गई।
क्या है कर्मचारी पेंशन (ईपीएस) स्कीम 1995?
कर्मचारी पेंशन स्कीम 1995 के अनुसार आपके एम्प्लॅायर (नियोक्ता) द्वारा ईपीएफ में किए गए योगदान का एक निश्चित हिस्सा ईपीएस में यानी पेंशन मद में जाता है। नियमों के मुताबिक आप अपनी बेसिक सैलरी प्लस डीए (अगर डीए नहीं है तो बेसिक सैलरी) का 12 फीसदी ईपीएफ में योगदान देते हैं। जितनी रकम का योगदान आप ईपीएफ में करते हैं, उतनी ही रकम यानी 12 फीसदी की राशि आपका नियोक्ता भी आपके ईपीएफ अकाउंट में मिलाता है। लेकिन नियोक्ता द्वारा दिए गए योगदान का एक हिस्सा ईपीएस में जाता है। यह हिस्सा बेसिक सैलरी का 8.33 फीसदी या अधिकतम 1,250 रुपए होता है। मतलब नियोक्ता प्रति महीने अधिकतम 15,000 रुपए सैलरी (पेंशनेबल सैलरी) का 8.33 फीसदी ही आपके ईपीएस अकाउंट में योगदान दे सकता है, भले ही आपकी सैलरी कितनी भी हो। मौजूदा नियमों के अनुसार अगर आप न्यूनतम 10 साल तक ईपीएस में योगदान देते हैं तो आपको 58 साल की उम्र के बाद पेंशन मिलनी शुरू होगी।
क्या थे कम्युटेशन के पुराने नियम?
पीएफ खाताधारक अपने रिटायरमेंट के बाद पेंशन की जो राशि प्रति महीने पाने के हकदार हैं, उसमें से एक निश्चित राशि अगर एडवांस में एकमुश्त निकालते हैं, तो उसे पेंशन का कम्युटेशन कहते हैं। 26 सितंबर 2008 से पहले यह नियम था कि पीएफ खाताधारक रिटायरमेंट के बाद अपने 100 महीने की पेंशन का एक तिहाई हिस्सा एकमुश्त एडवांस में (कम्युटेड पेंशन) निकाल सकते थे। साथ ही 15 वर्ष के बाद पूरी पेंशन की बहाली का प्रावधान था (जिसे सरकार ने 2009 में वापस ले लिया।) इसको ऐसे समझते हैं - मान लीजिए अगर किसी पीएफ खाताधारक की पेंशन प्रति महीने 3,000 रुपए है। तो 100 महीने की कुल पेंशन 3 लाख रुपए हो गई। तो इसका एक तिहाई यानी उसे एक लाख रुपए एडवांस में निकालने की अनुमति थी। इस राशि को लेने के बाद उस पेंशनधारक को 15 वर्ष तक प्रति महीने 3,000 रुपए की जगह 2,000 रुपए की पेंशन ही मिलती थी। हां, 15 वर्ष यानी 180 महीने के बाद उसे फिर से पेंशन की पूरी राशि यानी 3,000 रुपए प्रति माह मिलने लगते थे।
कम्युटेशन के नए नियम अधिक फायदेमंद
अब ईपीएफओ फिर से अपने पीएफ खाताधारकों के लिए कम्युटेशन को कुछ बदलाव के साथ बहाल करने जा रहा है। कम्युटेशन के नए नियम पुराने नियम की तुलना में फायदेमंद हैं। नए नियमों के तहत अब खाताधारक 100 महीने के बजाय 15 वर्ष यानी 180 महीनों की कुल पेंशन का एक तिहाई हिस्सा एडवांस में ले सकता है। उदाहरण के लिए मान लीजिए आप रिटायरमेंट के बाद प्रति महीने 3 हजार रुपए पेंशन पाने के हकदार हैं तो 15 साल की कुल पेंशन बनेगी 5.40 लाख रुपए। आप इसका अधिकतम एक तिहाई हिस्सा यानी 1.80 लाख रुपए एकमुश्त एडवांस में पाने के हकदार होंगे। इन 15 वर्षों तक आपको प्रति महीने 3 हजार रुपए की जगह पर 2 हजार रुपए पेंशन के तौर पर मिलेंगे। लेकिन 15 वर्ष के बाद आपको पूरी पेंशन यानी प्रति महीने 3 हजार रुपए मिलने लगेंगे। इस तरह पुराने के मुकाबले नए नियमों से आपको 80 हजार रुपए का फायदा होगा।
टैक्स के प्रावधान
कम्युटेड पेंशन की राशि पर टैक्स में भी छूट मिलेगी, जबकि अनक्म्यूटेड पेंशन की राशि टैक्सेबल होती है। अनक्म्यूटेड पेंशन की राशि पर आप स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा जरूर ले सकते हैं।